Hi guys,
Presenting my first poetry in hindi. I was surprised to see the world working in a different manner than I think....
Please comment what all of you think about this.
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
अब कोई मुझे नहीं रोक सकता,
सभी सिग्नल तोड़ने लगा हूँ में|
पढ़ाई की कीमत मालूम है मुझे,
बहुत सारे पैसे जोड़ने लगा हूँ में|
इस देश में कोई भी काम करना नहीं आसान,
इसीलिए रिश्वत जोड़ने लगा हूँ में|
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
ईमानदारी की नौकरी रास नहीं आई मुझे,
अब तो साहब के आगे हाथ पैर जोड़ने लगा हूँ में|
प्यार वफ़ा सब बेकार की बातें हैं,
हर चीज़ को पैसे से तोलने लगा हूँ में|
पहले कुछ शरम आती थी परितोष,
अब तो शर्मो हया छोड़ने लगा हूँ में|
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
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Please comment what all of you think about this.
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
अब कोई मुझे नहीं रोक सकता,
सभी सिग्नल तोड़ने लगा हूँ में|
पढ़ाई की कीमत मालूम है मुझे,
बहुत सारे पैसे जोड़ने लगा हूँ में|
इस देश में कोई भी काम करना नहीं आसान,
इसीलिए रिश्वत जोड़ने लगा हूँ में|
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
ईमानदारी की नौकरी रास नहीं आई मुझे,
अब तो साहब के आगे हाथ पैर जोड़ने लगा हूँ में|
प्यार वफ़ा सब बेकार की बातें हैं,
हर चीज़ को पैसे से तोलने लगा हूँ में|
पहले कुछ शरम आती थी परितोष,
अब तो शर्मो हया छोड़ने लगा हूँ में|
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
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