Monday, July 22, 2013
My first poetry
Hi guys,
Presenting my first poetry in hindi. I was surprised to see the world working in a different manner than I think....
Please comment what all of you think about this.
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
अब कोई मुझे नहीं रोक सकता,
सभी सिग्नल तोड़ने लगा हूँ में|
पढ़ाई की कीमत मालूम है मुझे,
बहुत सारे पैसे जोड़ने लगा हूँ में|
इस देश में कोई भी काम करना नहीं आसान,
इसीलिए रिश्वत जोड़ने लगा हूँ में|
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
ईमानदारी की नौकरी रास नहीं आई मुझे,
अब तो साहब के आगे हाथ पैर जोड़ने लगा हूँ में|
प्यार वफ़ा सब बेकार की बातें हैं,
हर चीज़ को पैसे से तोलने लगा हूँ में|
पहले कुछ शरम आती थी परितोष,
अब तो शर्मो हया छोड़ने लगा हूँ में|
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
Presenting my first poetry in hindi. I was surprised to see the world working in a different manner than I think....
Please comment what all of you think about this.
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
अब कोई मुझे नहीं रोक सकता,
सभी सिग्नल तोड़ने लगा हूँ में|
पढ़ाई की कीमत मालूम है मुझे,
बहुत सारे पैसे जोड़ने लगा हूँ में|
इस देश में कोई भी काम करना नहीं आसान,
इसीलिए रिश्वत जोड़ने लगा हूँ में|
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
ईमानदारी की नौकरी रास नहीं आई मुझे,
अब तो साहब के आगे हाथ पैर जोड़ने लगा हूँ में|
प्यार वफ़ा सब बेकार की बातें हैं,
हर चीज़ को पैसे से तोलने लगा हूँ में|
पहले कुछ शरम आती थी परितोष,
अब तो शर्मो हया छोड़ने लगा हूँ में|
जब से क़ानून तोड़ने लगा हूँ में,
दुखों को पीछे छोड़ने लगा हूँ में|
Friday, May 10, 2013
अंग्रेजी और बड़े लोग
यह जो बड़े बड़े लोग अच्छी अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं उनमें से 95 प्रतिशत लोग फेंकू किस्म के होतें है। इन्होने ज़िन्दगी भर बस एक टेबल कुर्सी पर बैठ कर किताबें पढ़ी हैं, ज्ञान रटा है, अंग्रेजी बोलनी सीखी है, और फिर लोगो को वही बकवास सुनाई है। इनमें से आधे लोग आपको न्यूज़ चैनल पर मिलेंगे, ऐसा लगता है, बेचारा देश की चिंता में आज सुबह का नाश्ता छोड़ कर आया है, भूखा प्यासा नेताओं को इकठ्ठा कर के बकवास किये जा रहा है / रही है। पूछ रहा है, की ऐसा कब तक चलेगा? वैसा कब तक चलेगा? कुछ लोग पार्लियामेंट में मिलेंगे, जो की इतनी अच्छी अंग्रेजी बोलतें हैं, की ज्यादातर तो समझ ही नहीं आती, तो कौन इनसे सवाल करे .....वैसे यह इतनी अच्छी अंग्रेजी किसे दिखाने के लिए बोलते हैं? जो सबसे क्लिष्ठ शब्द है, वही ढूंढ कर लाते हैं, ताकि कोई आगे कोई सवाल न कर ले, साले को समझ में आएगा तो पूछेगा ना।
फिर कुछ लोग आपको बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों में मिलेंगे, क्या अंग्रेजी बोलतें हैं, भाई वाह! यह लोग लगातार निम्न शब्दों का इस्तेमाल करते हैं - initiative, Onus (जो की Anus की तरह लगता है), responsibility, pro activeness, inculcate, ownership, mutually benefiting relationship ....सुनने में तो लगता है की इन सभी शब्दों का इस्तेमाल करने से कोई समस्या नहीं होनी चाहिए लेकिन सबसे ज्यादा समस्याएँ इन्ही लोगों के साथ दिखाई देती हैं।
इसके बाद जो लोग बच जाते हैं, वे हैं बड़े बड़े लेखक (अंग्रेजी वाले)...यह लोग आपको उन सभी को ज्ञान बांटते नज़र आयेंगे जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती है। यह लोग देश की गरीबी और लाचारी की चर्चा किसी बड़े 5 सितारा होटल की लॉबी में हो रहे समारोह में करेंगे जिसे सुनने पहले वाली तीन श्रेणिया आएँगी, जो ना गरीब हैं, न लाचार हैं। फिर यह अपनी किताबों पर हस्ताक्षर करेंगे और उसे बेच कर वापस अपने वतन इंग्लैंड या अमेरिका चले जायेंगे। फिर यह कहेंगे की देश की समस्यायों पर मेरी नयी किताब आ रही है, आप pre order दीजिये।
कहने का तात्पर्य यह है की अगर बोलने से सारी समस्यायों का निवारण होता तो हमारे देश में कोई समस्या होती ही नहीं, क्योंकि जो काम करता है, उसे बोलने का समय नहीं होता है, और देश काम करने से आगे बढ़ता है बोलने से नहीं, इसीलिए बोलो कम और काम करो।
कहने का तात्पर्य यह है की अगर बोलने से सारी समस्यायों का निवारण होता तो हमारे देश में कोई समस्या होती ही नहीं, क्योंकि जो काम करता है, उसे बोलने का समय नहीं होता है, और देश काम करने से आगे बढ़ता है बोलने से नहीं, इसीलिए बोलो कम और काम करो।
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Udaipur, Rajasthan, India
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